रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के एक बयान ने राजनीतिक हलकों में हलचल पैदा कर दी है। दिल्ली में एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा:
“दुनिया में सीमाएँ स्थायी नहीं होतीं। कौन जानता है कि कल सिंध फिर से भारत का हिस्सा बन जाए।”
यह बयान पाकिस्तान-अधिकृत क्षेत्रों, ऐतिहासिक सिंध प्रांत और भारत की सांस्कृतिक जड़ों पर चर्चा को फिर जीवित कर रहा है।
जहाँ कुछ लोग इसे भारत की मजबूत कूटनीतिक स्थिति के रूप में देख रहे हैं, वहीं विपक्ष इसे विवादित बयान बताकर राजनीतिकरण का आरोप लगा रहा है।
सिंध भारत के लिए सिर्फ भूगोल नहीं, बल्कि सिंदूरी संस्कृति, सिंधु सभ्यता और भारतीय विरासत का मूल अंग माना जाता है।
यह बयान आने वाले दिनों में और बहस को जन्म देगा।