नई दिल्ली, 11 नवंबर 2025: सोमवार शाम करीब 6 बजे दिल्ली के ऐतिहासिक लाल किला के पास हुए भीषण धमाके ने पूरे देश को हिला दिया। यह विस्फोट एक सफेद I-20 कार में हुआ, जिसमें सवार सभी लोग मौके पर ही मारे गए। अभी तक 8 लोगों की मौत और 24 से अधिक घायल होने की पुष्टि हुई है। जांच एजेंसियों ने घटना को “संभावित आतंकी साजिश” मानते हुए कई जगहों पर छापेमारी शुरू कर दी है।
🔹 धमाका कैसे हुआ?
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, लाल किले की पार्किंग एरिया के पास एक कार में अचानक जोरदार धमाका हुआ। आसपास के दुकानों और वाहनों के शीशे चकनाचूर हो गए। धमाके की आवाज इतनी तेज थी कि चांदनी चौक और दरियागंज तक सुनाई दी। पुलिस ने तुरंत पूरे क्षेत्र को घेर लिया और बम स्क्वाड को मौके पर बुलाया।
🔹 जांच में क्या सामने आया?
NDTV और अन्य मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, प्राथमिक जांच में पता चला है कि कार में अत्यधिक ज्वलनशील रासायनिक पदार्थ रखे गए थे। कार का रजिस्ट्रेशन नंबर फरीदाबाद का बताया जा रहा है। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल, NIA और IB के अधिकारी मौके पर पहुंच गए हैं।
सुबह फरीदाबाद में भी एक संदिग्ध बैग और विस्फोटक सामग्री मिलने की खबर थी — अब जांचकर्ता दोनों घटनाओं के बीच संबंध तलाश रहे हैं।
🔹 मृतक कौन हैं?
पुलिस सूत्रों ने बताया कि कार में ड्राइवर समेत तीन लोग सवार थे। धमाके में तीनों की मौके पर ही मौत हो गई। अब तक दो शवों की पहचान हो चुकी है — एक की पहचान अरमान खान (उम्र 27) और दूसरे की रईस अहमद (उम्र 30) के रूप में हुई है, जो दोनों उत्तर प्रदेश के रहने वाले बताए जा रहे हैं।
जांच एजेंसियां तीसरे व्यक्ति की पहचान के लिए DNA सैंपल ले रही हैं।
🔹 सरकार की प्रतिक्रिया
गृहमंत्री अमित शाह ने देर रात उच्च-स्तरीय बैठक बुलाई और दिल्ली पुलिस कमिश्नर से घटना की विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। बैठक में NIA, RAW और IB के शीर्ष अधिकारी भी शामिल रहे। अमित शाह ने कहा:
“किसी भी साजिश को बख्शा नहीं जाएगा। जो भी इसके पीछे है, उसे सख्त सजा दी जाएगी।”
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी घटना पर गहरा शोक जताया और घायलों के लिए मुफ्त इलाज की घोषणा की।
🔹 दिल्ली और अन्य शहरों में हाई अलर्ट
धमाके के बाद दिल्ली, मुंबई, पटना, लखनऊ, जयपुर, अहमदाबाद और चंडीगढ़ सहित कई बड़े शहरों में हाई अलर्ट घोषित किया गया है। रेलवे स्टेशन, मेट्रो स्टेशन और एयरपोर्ट पर सुरक्षा बढ़ा दी गई है।
दिल्ली पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और किसी भी संदिग्ध वस्तु या व्यक्ति की सूचना तुरंत पुलिस कंट्रोल रूम को दें।
🔹 सोशल मीडिया पर चर्चा और अफवाहें
घटना के तुरंत बाद सोशल मीडिया पर कई वीडियो और तस्वीरें वायरल हुईं। कुछ वीडियो में धमाके के बाद उठता धुआं और चीख-पुकार का माहौल दिखाई दे रहा है।
हालांकि, पुलिस ने चेतावनी दी है कि अप्रमाणित वीडियो या पोस्ट शेयर न करें, क्योंकि जांच प्रभावित हो सकती है।
🔹 आतंक से जुड़ा एंगल?
सुरक्षा एजेंसियां इस धमाके को “संगठित आतंकी गतिविधि” के रूप में देख रही हैं। NIA सूत्रों ने बताया कि विस्फोटक का प्रकार “RDX मिश्रण” जैसा प्रतीत होता है।
सुबह फरीदाबाद में मिली संदिग्ध सामग्री और शाम को लाल किला विस्फोट — दोनों में इस्तेमाल हुए रसायनों का पैटर्न समान है। इससे जांचकर्ताओं को यह शक है कि यह किसी बड़े नेटवर्क का ट्रायल ब्लास्ट हो सकता है।
🔹 दिल्ली की सुरक्षा पर गंभीर सवाल
लाल किला भारत का ऐतिहासिक और अत्यधिक संवेदनशील स्थल है। हर साल स्वतंत्रता दिवस पर प्रधानमंत्री यहीं से तिरंगा फहराते हैं। ऐसे में इस तरह का धमाका सुरक्षा तंत्र पर गंभीर सवाल उठाता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर यह हमला किसी आतंकी साजिश का हिस्सा है, तो दिल्ली की सुरक्षा प्रणाली को पूरी तरह से पुनर्गठित करने की आवश्यकता होगी।
🔹 नागरिकों की प्रतिक्रिया
धमाके के बाद दिल्लीवासियों में डर और गुस्सा दोनों दिखाई दे रहा है। स्थानीय दुकानदारों ने बताया कि पिछले कुछ दिनों से आसपास कुछ अनजान लोग घूमते दिखाई दे रहे थे। एक दुकान-मालिक ने बताया,
“हमने दो-तीन बार एक सफेद कार यहां देखी थी। लग रहा था किसी की नजर लाल किले के आसपास के इलाके पर थी।”
सोशल मीडिया पर लोग सरकार से सख्त कार्रवाई और बेहतर सुरक्षा की मांग कर रहे हैं।
🔹 सुरक्षा एजेंसियों की अगली रणनीति
रातभर NIA और दिल्ली पुलिस ने फरीदाबाद, लाजपत नगर, जामिया नगर और नोएडा में कई संदिग्ध ठिकानों पर छापेमारी की।
सूत्रों के अनुसार, अब तक चार संदिग्धों को हिरासत में लिया गया है, जिनसे पूछताछ जारी है।
साथ ही, विस्फोट स्थल से मिले CCTV फुटेज और कार के अवशेष को जांच के लिए फॉरेंसिक लैब भेजा गया है।
🔹 विश्लेषण: यह घटना क्या संकेत देती है?
यह धमाका सिर्फ एक सुरक्षा-चूक नहीं, बल्कि दिल्ली की आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था के लिए चेतावनी की घंटी है।
लाल किला जैसा सुरक्षित इलाका अगर निशाने पर है, तो यह बताता है कि आतंकी नेटवर्क अभी भी सक्रिय हैं और बड़े शहरों में उनकी पैठ बनी हुई है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि देश को अब “प्रोएक्टिव इंटेलिजेंस-सिस्टम” की दिशा में काम करना होगा — यानी खतरे का अनुमान पहले से लगाना, न कि बाद में प्रतिक्रिया देना।