नई दिल्ली, 11 नवंबर 2025:
राजधानी दिल्ली में वायु प्रदूषण लगातार खतरनाक स्तर पर पहुँच गया है। हाल ही में जम्मू-कश्मीर के पूर्व पुलिस महानिदेशक शेष पाल वैद (Shesh Paul Vaid) ने दिल्ली की हवा पर चिंता जताते हुए कहा कि राजधानी में रहना अब “हज़ार सिगरेट पीने जैसा अनुभव” बन गया है।
🚨 दिल्ली में वायु प्रदूषण संकट
पिछले कुछ दिनों से दिल्ली-एनसीआर का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 450 से ऊपर दर्ज किया जा रहा है, जो “गंभीर” श्रेणी में आता है। यह स्थिति न केवल पर्यावरणीय बल्कि मानवीय संकट (Humanitarian Crisis) बनती जा रही है।
पूर्व DGP ने कहा —
“मैं दिल्ली में 15 दिन रुका, और यह मेरे जीवन का सबसे बुरा अनुभव था। ऐसा लगा जैसे हर सांस के साथ जहर अंदर जा रहा है।”
🌫️ कारण क्या हैं?
विशेषज्ञों के अनुसार दिल्ली की हवा खराब होने के पीछे कई कारण हैं:
- पंजाब-हरियाणा में पराली जलाना (Stubble Burning)
- दिल्ली-एनसीआर की वाहन संख्या में वृद्धि
- निर्माण कार्यों से उड़ने वाली धूल (Dust Pollution)
- मौसम परिवर्तन के कारण हवा का कम बहना
🏥 स्वास्थ्य पर गंभीर असर
AIIMS और सफदरजंग अस्पताल के डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि इतने उच्च स्तर के प्रदूषण से बच्चों, बुजुर्गों और अस्थमा रोगियों पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।
फेफड़ों के रोग विशेषज्ञों ने कहा है कि –
“एक दिन की दिल्ली की हवा में रहना, लगभग 20 सिगरेट पीने के बराबर नुकसान करता है।”
🏛️ सरकार की प्रतिक्रिया
दिल्ली सरकार ने ऑड-ईवन योजना, स्कूल बंद रखने, और निर्माण गतिविधियों पर रोक जैसे कदम उठाए हैं। साथ ही ग्रैप-4 (GRAP-4) स्तर की पाबंदियाँ लागू की गई हैं।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) ने लोगों से अपील की है कि वे अनावश्यक वाहन प्रयोग न करें और मास्क का उपयोग करें।
🌍 आगे का रास्ता
पर्यावरणविदों का कहना है कि इस समस्या का दीर्घकालिक समाधान तभी संभव है जब केंद्र और राज्य मिलकर नीति बनाएं —
- स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा,
- सार्वजनिक परिवहन सुधार,
- और पराली न जलाने के लिए वैकल्पिक समाधान।
📢 निष्कर्ष
दिल्ली का प्रदूषण अब केवल स्थानीय नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य आपातकाल जैसा विषय बन चुका है।
जैसा कि पूर्व DGP वैद ने कहा —
“दिल्ली की हवा अब सांस नहीं, सज़ा बन चुकी है।”
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